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कोवैक्सीन के फेज -2 के ट्रायल्स के नतीजे हुए जारी, एक साल तक रखेगी सुरक्षित

कोवैक्सीन के फेज़-2 के नतीजे

भारत बायोटेक ने स्वदेशी वैक्सीन- कोवैक्सिन के फ़ेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स के नतीजे घोषित किए हैं। इसके अनुसार यह वैक्सीन कम से कम 12 महीनों तक आपको कोरोना से सुरक्षित रखने में सक्षम है।

इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह सभी आयु के वर्गों के लोगों के लिए फिर चाहे वह पुरुष हो या महिला सभी पर बराबरी से इफेक्टिव साबित हुई है। इस समय वैक्सीन के फेज-3 के ट्रायल्स चल रहे हैं। कंपनी ने अपनी वैक्सीन के लिए ड्रग रेगुलेटर से इमरजेंसी अप्रूवल भी मांगा है।

दिसंबर के अंत तक इमरजेंसी अप्रूवल भी मिल सकता है

खबर यह भी है कि एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन कोवीशील्ड को दिसंबर के अंत तक इमरजेंसी अप्रूवल भी मिल सकता है इसके लिए ड्रग रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने जो डाटा मांगा था इस पर भारत में वैक्सीन के ट्रायल्स पर काम कर रही सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) ने जमा कर दिया है।

इस बीच, भारत बायोटेक ने बुधवार को कोवैक्सीन यानी BBV152 के फेज-2 के नतीजे घोषित किए हैं। इससे लंबी अवधि में शरीर में बेहतर एंटीबॉडी और टी सेल मेमोरी रिस्पांस दिखाया है। फेज-1 वॉलिंटियर्स में वैक्सीनेशन के दूसरे डोज देने के 3 महीने बाद भी वैक्सीन इफेक्टिव देखने को मिली है तो वही फेज-2 ट्रायल्स में वैक्सीन ने बढ़ा हुआ ह्यूमरल और सेल-मीडिएटेड ह्यूमन रिस्पांस दिखाया है।

कोवैक्सीन फेज-2 के ट्रायल्स के नतीजे

  1. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के ट्रायल्स 380 स्वस्थ बच्चों और वयस्कों पर रेंडमाइज आधार पर किया गया। 3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फार्मूले तय किए थे जिनके लिए 2 ग्रुप्स बनाए गए और उन्हें दो इंट्रामस्कुलर रोज 4 हफ्ते के अंतर से लगाए गए थे।

2. फेज-1 ट्रायल के फॉलो-अप में कोवैक्सीन ने हाई लेवल के न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी प्रोड्यूस किए हैं। दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वालंटियर में एंटीबॉडी की संख्या बड़ी हुई दिखी। इन नतीजों के आधार पर कंपनी का यह दावा है कि कोवैक्सीन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक बनी रहती है।

3. फेज-1 स्टडी के मुकाबले फेज-2 स्टडी में न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबॉडी की संख्या ज्यादा पाई गई है इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इस वैक्सीन को लगाने के बाद जो लोकल और सिस्टमैटिक साइड इफेक्ट दिख रहे थे वह भी सिर्फ 24 घंटे के अंदर ठीक हो गए हैं। कोई भी गंभीर प्रकार का साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है।

क्यों लग रही है इमरजेंसी अप्रूवल में देरी

भारत बायोटेक ने दिसंबर के पहले हफ्ते में ही कोवैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांग लिया था इस पर ड्रग रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने भारत बायोटेक से यह कहा है कि सेफ्टी और एफीकेसी से जुड़ा अतिरिक्त डेटा पहले जमा किया जाए। तभी इमरजेंसी यूज़ अप्रूवल (EUA) दिया जा सकता है। इसके लिए कंपनी को देश में चल रहे फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल से सेफ्टी और एफीकेसी डाटा जमा कराना होगा।

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