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गौतम गंभीर द्वारा शुरू की गई “जन रसोई”, जरूरतमंदो को एक रुपए में भरपेट भोजन

गौतम गंभीर द्वारा “जन रसोई” की शुरुवात

बीजेपी सांसद और पूर्व क्रिकटर गौतम गंभीर ने ‘जन रसोई’ भोजनालय की गुरूवार को शुरुआत की। जिसमें उनके संसदीय निर्वाचन क्षेत्र पूर्वी दिल्ली में जररूतमंद लोगों के लिए एक रुपये में दोपहर का भोजन दिया गया।

गंभीर की इस पहल का राजनीतिक गलियारों के साथ ही सोशल मीडिया पर भी खूब समर्थन हो रहा है। गंभीर के इस ‘सेवाभाव’ की स्वीकार्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह से उनसे जुड़ा #GG1RupeeCanteen हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। इसी बीच एक बार फिर गंभीर ने ट्वीट करते हुए साफ कर दिया कि वो किस तरह की राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं।

ट्वीट में लिखी ये बात, सब हो गए खुश

गौतम गंभीर ने अपने ट्वीट में यह लिखा है कि “ना मन्दिर से आरती, ना मस्जिद से आज़ान लाया हूँ… ना राम का वास्ता, ना मोहम्मद की दुआ लाया हूँ… इंसान हूँ, इंसान के लिए दो रोटी लाया हूँ….वादे नहीं, इरादे लाया हूँ…”।

गांधी नगर में शुरू की पहली “जन रसोई”

गंभीर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने गुरूवार को गांधी नगर में पहले भोजनालय की शुरुआत की, जिसके बाद गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर अशोक नगर में भी ऐसा ही भोजनालय खोला जाएगा।

गंभीर ने यह कहा है कि ‘मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि जाति, पंथ, धर्म और वित्तीय हालात से परे सभी को स्वस्थ और स्वच्छ भोजन करने का पूर्ण अधिकार है। यह देखकर अफसोस होता है कि बेघर और बेसहारा लोगों को दिन में दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती।’

गंभीर ने पूर्वी दिल्ली के दस विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम एक ‘जन रसोई’ भोजनालय खोलने की भी योजना बनाई है। सांसद के कार्यालय की ओर से बयान में कहा गया है, ‘देश के सबसे बड़े थोक कपड़ा बाजारों में शुमार गांधी नगर में खोली जाने वाली जन रसोई पूरी तरह आधुनिक होगी, जिसमें जररूतमंदों को केवल एक रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।’

एक बार में कम से कम 100 लोग खा सकते है

उनके बयान के अनुसार इसमें एक समय में 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते फिलहाल एक बार में 50 लोगों को ही बैठने की अनुमित दी जाएगी। दोपहर के भोजन में चावल, दाल और सब्जी दी जाएगी।

यह भी कहा गया है कि इस परियोजना का वित्तपोषण गौतम गंभीर फाउंडेशन तथा सांसद के निजी संसाधनों से किया जाएगा और सरकार की किसी भी प्रकार की मदद नहीं ली जाएगी।

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