Latest Barish Shayari [2022] | Shayari On Barish | Rain Shayari

Latest Barish Shayari

Latest Barish Shayari

बारिश समझनी है तो किसानों के चेहरे पढो..
इन शायरियों ने तो इसे इश्क के दायरे में बांध रखा है !

तुम थे तो पिछली बारिश ज़िन्दगी थी।
इस बार तो सिर्फ पानी बरस रहा है।

इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं ,
कच्चा तेरा मकान है कुछ तो ख्याल कर

भीनी सी खुश्बू लिए याद आई एक कहानी,
ये मौसम की बारिश और बारिश का पानी।,

हुई सावन की पहली बारिश
वह मिल जाये बस यही गुजारिश
मिलकर भीगे इस मौसम मे हम दोनों
लगाई मैंने खुदा से बस यहीं सिफारिश। |

सावन की फुहार ,हर तरफ मल्हार
लगाओ पेड़ों पर झूला ,मिलकर देखे सावन का मेला। |

खुद को इतना भी मत बचा
बारिश हो तो बस भीग जा।

बरसती बारिश मुझसे कहती है
कुछ बारिश तेरे अंदर भी रहती है।

यह सावन का मौसम तेरे साथ होने का एहसास कराता है
तेरा प्यार मेरे साथ है यह एहसास दिल मे जगाता है।

तुम ठंडी हवा बन मुझे जगाने आयी

बरसात हुई पर सावन नहीं आया
अबकी बरस भी लौटकर मेरा साजन नहीं आया।

अब कौन घटाओं को, घुमड़ने से रोक पायेगा,
ज़ुल्फ़ जो खुल गयी तेरी, लगता है सावन आयेगा..❗

“Ab Kaun Ghatao Ko Ghumadane Se Rok Payega,
Zulf Jo Khul Gayi Teri, Lagata Hain Sawan Aayega..।”

Shayari On Barish

ज़रा ठहरो , बारिश थम जाए तो फिर चले जाना, किसी का तुझ को छू लेना मुझे अच्छा नहीं लगता..❗

“Jara Thaharo Barish Tham Jaye To Fir Chali Jana,
Kisi Ka Tujhe Chhu Len Mujhe Achchha Nahi Lagata..।”

ये हसीं मौसम, ये नज़ारे, ये बारिश, ये हवाएँ, लगता है मोहब्बत ने फिर मेरा साथ दिया है..❗

“Ye Hansi Mausam Ye Njare Ye Barish Ye hawae,
Lagta Hai Mosabbat Ne Fir Mera Sath Diya Hai..।”

मोहब्बत तो वो बारिश है,
जिससे छूने की चाहत मैं,
हथेलियां तो गीली हो जाती है,
पर हाथ खाली ही रह जाते है।

जब भी होगी पहली बारिश, तुमको सामने पायेंगे,
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम देख तो पायेंगे।

तुम भी लौट आओ ना सावन की तरह,
मेरी सूखी हुई जिंदगी में बारिश की तरह।

कभी बेपनाह बरस पडी, कभी गुम सी है,
यह बारिश भी कुछ – कुछ तुम सी है।

खुद भी रोता है और मुझे भी रुला देता है,
ये बारिश का मौसम उसकी याद दिला देता है।

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था,
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था।

बारिशों से अदब-ए-मोहब्बत सीखो फ़राज़,
अगर ये रूठ भी जाएँ, तो बरसती बहुत हैं।

Tere Khayalo Me Chalte Chalte Kahin Fisal Na Jayun Main,
Apni Yaadon Ko Rok Le Ke Shahar Me Barish Ka Mausam Hai.

तेरे ख्यालों में चलते चलते कहीं फिसल न जाऊं मैं,
अपनी यादों को रोक ले के शहर में बारिश का मौसम है।

Wo Mere Ru-Ba-Ru Aya Bhi To Barsaat Ke Mousam Mein,
Mere Aansoo Beh Rahe The Wo Barsat Samajh Betha.

वो मेरे रु-बा-रु आया भी तो बरसात के मौसम में,
मेरे आँसू बह रहे थे और वो बरसात समझ बैठा।

Ai Barish Jara Tham Ke Baras,
Jab Wo Aa Jaye To Jam Ke Baras,
Pehle Na Baras Ke Wo Aa Na Sake,
Fir Itna Baras Ki Wo Ja Na Sake.

ऐ बारिश जरा थम के बरस,
जब वो आ जाये तो जम के बरस,
पहले न बरस के वो आ न सके,
फिर इतना बरस के वो जा न सके।

छत टपकती है उसके कच्चे घर की
वो किसान फिर भी बारिश की
दुआ करता होगा

अर्ज़ किया है-
बारिश की बूंदे लाती है बहार,
दे जाती एक अनजाना-सा करार.
जब पड़ती है चेहरे के ऊपर,
गीला कर उसे और बना देती सुन्दर.

Rain Shayari

रास्तो में सफ़र करने का
मज़ा आ जाता है
जब बारिश का सुहाना
मौसम हो जाता है

चाय-पकोड़े का आ गया समय,
क्यूंकि बारिश दे रही है दस्तक।
चलो छोडो अपने सभी काम,
और हो जाओ बारिश की ओर नतमस्तक।

ये बारिश की बूंदे नहीं
ये तो मेरे आंसू है
जो बह रहे है तुम्हारी याद में

आज की बरसात की दिल्लगी ही कुछ ऐसी है,
भीगे बिना कोई रह ना पाए थोड़ी ऐसी है.
खूबसूरती का आलम इस कद्र बढ़ गया है,
महकते मौसम का खुमार सभी पर चढ़ गया है.

आज की बरसात की दिल्लगी ही कुछ ऐसी है,
भीगे बिना कोई रह ना पाए थोड़ी ऐसी है.
खूबसूरती का आलम इस कद्र बढ़ गया है,
महकते मौसम का खुमार सभी पर चढ़ गया है.

सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में,
ज्यादा भीगना मत..
अगर धूल गई सारी ग़लतफहमियां,
तो फिर बहुत याद आएंगे हम!

Badlo ko keh do thoda
dheere barse
Agar unki yaad aayi
toh phir
Soch lena humse mukabla
ek tarfa hoga

बदलो को कह दो थोड़ा
धीरे बरसे
अगर उनकी याद आ
तो फिर
सोच लेना हमसे मुकबला
एक तरफ़ा होगा।

Kahi gir naa jaau mai
Aapko yaad karte karte
Aaj mere sheher mee
Zoro se barish ho rahi hai..!

कहीं गिर ना जाउ मैं
आपको याद करते करते हैं
आज मेरे शहर में
जोरो से बारिश हो रही है।

Hava o ka jor tha barish kahi or thi dil kisi ka toot?
raha tha or kisi or ka ?Jud raha tha

घंटों तक भिगोया बारिश ने मुझे फिर
भी में कोरा का कोरा ही रह गया।।?

बारिश समझनी है तो किसानों के चेहरे पढो..
इन शायरियों ने तो इसे इश्क के दायरे में बांध रखा है !

तुम थे तो पिछली बारिश ज़िन्दगी थी।
इस बार तो सिर्फ पानी बरस रहा है।

इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं ,
कच्चा तेरा मकान है कुछ तो ख्याल कर

भीनी सी खुश्बू लिए याद आई एक कहानी,
ये मौसम की बारिश और बारिश का पानी।,

 

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